Monday, 15 December 2014

हम...

हम

तुम कहते हो की
तुम 'तुम' हो
मैं कहती हूँ की
मैं 'मैं' हूँ

फिर जब हम साथ में होते हैं
तो
तुम क्यूँ 'तुम' नहीं रहते
मैं क्यूँ 'मैं' नही रहती

ये जो तुम्हारा और मेरा
'हम' हो जाना है
यही प्यार का तराना है

आओ-
जी ले इसे
उस दुनिया में भी जहाँ
हम एक दूसरे से अलग हैं

जहाँ तुम 'तुम' हो
और
जहाँ मैं मैं'' हूँ

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