Sunday, 7 December 2014

कई बार यूँ भी हुआ है

कई बार यूँ भी हुआ है...


कई बार यूँ भी हुआ है
की जब धुंध में चलते चलते
अचानक से तुम्हारी परछाई सी नज़र आई है
और ऐसा महसूस हुआ की तुम सामने ही हो
हर बार तो मुस्कुरा कर बात टाली नही जा सकती न

इसलिए कई बार तो मैं बहुत करीब गयी तुम्हारे
और तुम्हें छूकर भी देखा है
कई बार तो यूँ भी हुआ की
छूकर भी तुम्हारा अक्स कहीं नही खोया
और मुस्कुरा कर तुमने कहा हो
जैसे
मैं कोई सपना नहीं हूँ
तुम्हारा ख्याल नहीं जो आकर चला जाये
मैं हकीक़त हूँ
तुम्हारा प्यार हूँ
तुम्हारा दिल हूँ तुम्हारी जान हु
तुम्हारी आँखों में जो नमी है प्यार की
मैं उसकी पुख्ता पहचान हूँ
तुम्हारी सांसों में बसता हूँ
तुम्हारे ह्रदय का राग हूँ

महज़ इतनी सी बात हैं
अब मैं दिन में ख्वाब देखने लगी हूँ
तुम रु ब रु नहीं फिर भी
तुमसे बात करने लगी हूँ
हाँ ये सच हैं
मैं तुम्हें बहुत प्यार करने लगी हूँ

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