मन के मीत
भीड़ में भटकता ये मन
तुमको ही ढूँढता ये मन..
घर से निकलते ही..
दिल को समझाता ये मन..
आये होंगे साजन ज़रूर
ये सोच के मुस्कुराता ये मन..
तेज़ कदमो से चलना फिर
रूक के सोचता ये मन..
आयेंगे या नही आयेंगे
ऐसे ही उधेड़बुन करता ये मन..
अचानक सामने पाकर तुमको
हौले से मुस्काता ये मन..
नज़रो से नज़र मिलते ही
शर्माता लजाता ये मन..
तुमसे ही मिलाना चाहता है
फिर तुमसे ही सकुचाता ये मन..
मन के मीत को सामने पाकर
मन ही मन मुस्काता ये मन..
man bawraaa....!
ReplyDeletemay GOD colour your feather with bright shades.an admirable initiative.....go and get the height.
ReplyDeleteBeautiful..keep it up :)
ReplyDeletewow di.. keep it up....
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