Thursday, 13 February 2014

मन के मीत

मन के मीत 

भीड़ में भटकता ये मन 
तुमको ही ढूँढता ये मन.. 

घर से निकलते ही.. 
दिल को समझाता ये मन.. 

आये होंगे साजन ज़रूर 
ये सोच के मुस्कुराता ये मन.. 

तेज़ कदमो से चलना फिर 
रूक के सोचता ये मन.. 

आयेंगे या नही आयेंगे 
ऐसे ही उधेड़बुन करता ये मन..

अचानक सामने पाकर तुमको 
हौले से मुस्काता ये मन.. 

नज़रो से नज़र मिलते ही
शर्माता लजाता ये मन.. 

तुमसे ही मिलाना चाहता है  
फिर तुमसे ही सकुचाता ये मन.. 

मन के मीत को सामने पाकर 
मन ही मन मुस्काता ये मन.. 





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